क्या आप भी हो रहे है, डिप्रेशन का शिकार तो इसे जरूर पढ़ें।

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मेन्टल हेल्थ और डिप्रेशन क्या है। इससे कैसे लड़े।

मेन्टल हेल्थ एक ऐसा विषय है, जो हाल ही में हुए सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के वजह से उभर के ऊपर आ चुका है। आपके दोस्त, रिलेटिव में अगर कोई भी डिप्रेशन से झूझ रहा है, तो उनसे बात करें।

मेन्टल हेल्थ क्या है।

मेन्टल हेल्थ यानी कि आपका मानसिक स्वास्थ्य। जिस तरह इंसान के शरीर में कुछ तकलीफ, जख्म या इंफेक्शन होने से हम फिजिकली बीमार होते है, ठीक उसी तरह हमारे मानसिक स्थिति पर किसी भी तरह का प्रेशर आने पर हमारा मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ता है। इसकी वजह पढ़ाई का स्ट्रेस, फैमिली प्रोब्लेम्स, रिलेशनशिप, फाइनेंसियल प्रोब्लेम्स, आदि हो सकते है, जिससे आपको डिप्रेशन जैसी मानसिक बीमारी का सामना करना पड़ता है। साथ ही इसके नकारात्मक परिणाम आपके शारीरिक स्वास्थ्य पर भी होते है।

हम एक बात को कभी भी नजर अंदाज नहीं कर सकते कि दुनिया में 70% लोग डिप्रेशन का शिकार होते है। लेकिन इनमें से 50% लोग अपनी ट्रीटमेंट के लिए डॉक्टर के पास जाने से मना करते है, क्योंकि समाज में डिप्रेशन से गुजरने वाली व्यक्ति को पागल माना जाता है, जो सरासर गलत है। डिप्रेशन बहुत ही साधारण बीमारी है, जो आसानी से ठीक भी हो सकती है लेकिन सही इलाज के साथ। हालांकि की समाज के इसी गैर बर्ताव के कारण डिप्रेस्ड लोगों की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे समय हमें एक दूसरे की घृणा नहीं करनी चाहिए, बल्कि सहायता करने के लिए आगे बढ़ना चाहिए।

डिप्रेशन क्या है?

डिप्रेशन एक मानसिक बीमारी है, जिसमें इंसान उदास, दुखी, विचारों में खोया-खोया सा रहता है, साथ ही छोटी बातों पर चिढ़ना, ग़ुस्सा करता है। अलग-अलग लोगों में इसके अलग लक्षण दिख सकते है। सामान्य रूप से आपकी रोजाना सरल जीवनशैली में यह बाधा डाल सकता है। डिप्रेशन एक ऐसी मानसिक बीमारी है, जिसकी वजह आपके जीवन में आने वाली परेशानियों को लेकर आप जरूरत से ज्यादा सोचते है, ज्यादा परेशान रहते है, स्ट्रेस या अनेक्सएटी का शिकार होते है। डिप्रेशन बहुत ही आसानी से ठीक हो सकता है। सही ट्रीटमेंट के साथ आप कुछ ही हफ़्तों में डिप्रेशन से बाहर आ सकते है।

कैसे पता करें, की आप डिप्रेशन में है।

डिप्रेशन के लक्षणों के आधार पर आप जान सकते है की आप डिप्रेशन में है या नहीं। पुरुष, महिला और बच्चों में डिप्रेशन के अलग-अलग दिखने वाले लक्षणों को नीचे विस्तार से निम्नलिखित किया गया है।

बच्चों में मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन, ग़ुस्सा करना, बार-बार रोना, स्कूल में मन न लगना, स्कूल जाने से मना करना, दोस्तों और भाई बहनों से दूरी बनाना, सुसाईड के ख्याल आना, पढ़ाई पर ध्यान न देना, मार्क्स कम आना, कॉन्सन्ट्रेट करने में परेशानी, डर का बढ़ना, कम बातें करना, अकेले रहना, खेलने कूदने से मना करना, वजन बढ़ना या कम होना आदि हो सकते है।

महिलाओं में थकान, रोज के कामों में मन न लगना, चिड़चिड़ापन, सोशल एक्टिविटी से इनकार, लोगों से मिलने और बाते करने में कमी, खाने पीने पर ध्यान न देना, वजन कम या ज्यादा होना, कम नींद या बहुत ही ज्यादा सोना, देर रात तक जागना, धीरे बात करना, आत्महत्या के ख्याल आना, यह लक्षण होते है।

पुरुषों में नशे में बढ़ोतरी, होपलेस बनना, खोया-खोया रहना, हद से ज्यादा ग़ुस्सा करना, सेक्सुअल एक्टिविटी में कमी आना, काम में मन न लगाना, जीने की इच्छा न रहना, थकान, अकेलापन, खालीपन आदि लक्षण होते है।

डिप्रेशन की वजह क्या हो सकती है?

अगर आपके परिवार में भी आपके माता-पिता डिप्रेशन से गुजर चुके है, तो आपको डिप्रेशन हो सकता है।

आपके साथ बचपन में या फिर कोई भी ऐसा हादसा जिसका आपके मन को गहरा सदमा पहुंचा हो।

अगर आपके दिमाग का फ्रंट लोब कम सक्रिय है।

ड्रग्स का सेवन।

आपके मानसिक स्थिति जैसे कि ज्यादा डरना, आत्मविश्वास की कमी, जिस कारण अपनी परेशानियों से लड़ने में आप कम पड़ सकते है।

डिप्रेशन के दुष्परिणाम।

डिप्रेशन एक मानसिक बीमारी होते हुए भी आपको इसकी वजह से कुछ शारीरिक बीमारियां हो सकती है, जिनमें ARTHRITIS, ASTHMA, CANCER, CARDIOVASCULOR DISEASE, DIABETES, OBESITY का समावेश होता है।
हालांकि की थोड़ी देर के लिए किसी बात से उदास या दुखी महसूस करना साधारण बात है, लेकिन यही चीज अगर हर रोज होने लगें, तो इसे नजर अंदाज करना सही नहीं है।
डिप्रेशन एक ऐसी मानसिक बीमारी है, जो बिलकुल ठीक हो सकती है, लेकिन इसके लिए आपको सही इलाज करना आवश्यक है। आप ट्रीटमेंट फॉलो नहीं करते है, तो इसके घातक परिणामों का सामना आपको करना पड़ सकता है।

डिप्रेशन के साथ कैसे लढ़े। डिप्रेशन के लिए ट्रीटमेंट

अगर आपको लगता है कि आप डिप्रेशन में है, इसके लिए आपको ट्रीटमेंट की आवश्यकता है, तो बिना किसी डर के आपको डॉक्टर के पास जाना चाहिए। बहुत सारे लोग यह सोचते है कि Phycologists के पास जाने से उन्हें पागल ठहराया जाएगा। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं और अगर ऐसा है भी तो ऐसी बातों पर ध्यान देने से बेहतर आप अपनी सेहत पर ध्यान दे।

  • Medicines – आपके डॉक्टर द्वारा Prescribe की गई, दवाइयां आपको सही मात्रा और वक्त पर लेनी चाहिए। लेकिन साथ में यह भी याद रखें कि Antidepressants आपके सेहत के लिए हानिकारक भी होती है।
  • Psychotherapy – आपके डॉक्टर के साथ आप अपनी परेशानियां शेयर कर सकते है, जिनके मार्गदर्शन से आप नकारात्मक सोच की तरफ न बढ़ते हुए सकारात्मक विचारों को अपनाएंगे। आपको जीने का और अपने प्रोब्लेम्स का सही तरीका मिल सकता है।

इन दोनों के अलावा भी कुछ उपाय है, जिन्हें आप डॉक्टर की सलाह से अपना सकते है।

दिन में 20-30 मिनट तक व्यायाम करें। योगा, वाल्क, दौड़ जिस व्यायाम प्रकार को अपनाने से आप बेहतर महसूस कर सकते है उसे अपनाए।

जिन चीजों को आप नहीं कर सकते, उनके लिए मना करना सीखें और जो आप नहीं कर सकते उसे मजबूर होकर करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

अपना खाना वक्त से खाए। दिन के 8 घंटों की नींद को पूरा करें।

दारू, शराब, सिगरेट और ड्रग्स जैसे नशों से दूर रहे।

नकारात्मक लोगों से दूर रहें। सकारात्मक विचारों को अपनाने के लिए अच्छी किताबें पढ़े, मोटिवेशनल वीडियो देखें।

आपका दिमाग ही आपकी ताकत है और आपकी कमजोरी भी। इसीलिए अपने विचारों को हमेशा सकारात्मक रखें।

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