क्या LAC : भारत-चीन, तीसरे महायुद्ध का कारण बनेगा?

क्या LAC : भारत-चीन, तीसरे महायुद्ध का कारण बनेगा?

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India China Third World War

जानिए क्या है LAC: भारत-चीन विवाद की असली वजह

पूरी दुनिया में तबाही मचाने वाले कोरोना वायरस की वजह से दुनिया के बड़े-बड़े देश अमरीका, ब्रिटन, इटली, भारत, आदि अभी लॉकडाउन की स्थिति में है। भारत में लॉकडाउन की शुरुआत 25 मार्च से हुई है, जो अब तक जारी है। भारत में हर नए दिन कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ती ही जारी है, वही पर इस लॉकडाउन की स्थिति में ऐसे अनेक मुद्दे है, जो बहुत ही कंट्रोवरशीअल और तनाव पूर्ण है। इन्हीं मुद्दों में से ही एक है, LAC : भारत-चीन

आज हम आपको Lac : भारत-चीन क्या है, इसकी शुरुआत कहाँ से हुई, इस विषय को लेकर शनिवार को हुई दोनों देशों की मीटिंग में क्या हुआ, इन सारे विषयों पर उचित और आवश्यक जानकारी दे रहे है।

कोरोना लॉक डाउन के दौरान LAC : भारत-चीन के विवाद शुरुआत
सीमा पर स्थित विवादित भागों पर अपने टेंट लगाना और धीरे-धीरे कन्स्ट्रक्शन का काम बढ़ाते हुए उस प्रदेश पर अपना हक़ जमाना, चीन की बहुत ही पुरानी आदत है। सीमा पर आने वाले गलवां नदी के आसपास के प्रदेश में चीन ने 80 टेंट लगाए थे, जहाँ से इस विवाद की शुरूआत हुई जिस कारण लदाख की पूर्व सीमा पर दोनों देशों द्वारा आर्मी फ़ोर्स को बढ़ाया गया।

अगर भारत इस तनाव को बढ़ाता है, तो भारत को इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है, ऐसी धमकी भी चीन ने भारत को दी है। डोकलाम विवाद के बाद भारत और चीन में होने वाला यह सबसे बड़ा विवाद माना जाता है।

LAC : भारत-चीन विवाद को लेकर 6 जून 2020 के दिन हुए मीटिंग के निष्कर्ष

5 और 6 मई को भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुए हिंसक सामने के बाद, पूर्व लदाख में हालात ज्यादा खराब हो गए थे। 9 मई को उत्तरी सिक्किम में भी कुछ इसी तरह के हालात पैदा हुए, जिससे LAC : भारत-चीन विवाद काफी तनाव पूर्ण होने लगा।

इन आक्रामक घटनाओं के बाद भारतीय सेना के लीडर द्वारा यह फैसला किया गया कि, भारतीय सेना पैंगोंग, त्सो, गलवां घाटी, डेमचोक जैसे विवादित क्षेत्रों में चीनी सरकार द्वारा हो रहे आक्रमण से निपटने के लिए एक दृढ़ दृष्टिकोण अपनाएगी और चीन को करारा जवाब देगी।

सूत्रों का मानना है, कि LAC : भारत-चीन के उस पार 180 किलोमीटर दूर स्थित चीनी आर्मी बेस पर सैटेलाईट द्वारा कब्जा पाने में भारत सफल हुआ है। साथ ही चीनी सेना LAC : भारत-चीन के पीछे की तरफ अपने ठिकानों पर तोपे, तोपखाने, आर्मी सोल्जर्स और फाइटर इक्विपमेंट्स को बढ़ाते हुए नजर आ रही है।

साथी ही LAC : भारत-चीन बॉर्डर पर चीनी आर्मी की उपस्थिति हर दिन बढ़ती जा रही है, जिस कारण भारतीय सेना भी अपने सैनिकों को बॉर्डर पर भेजकर अपनी उपस्थिति को बढ़ावा दे रही है, जिससे चीन के आक्रमण पर भारत किसी भी तरह पीछे न रह जाए।

इस तनाव पूर्ण परिस्थिति को सुलझाने के लिए दोनों देशों की लोकल लेवल पर करीबन 12 बार चर्चा होने के बाद, इस शनिवार यानी 6 जून 2020 को भारत-चीन सेनाओं के प्रमुख अधिकारियों के बीच मोलड़ो में एक मीटिंग हुई। यह मीटिंग भी सुबह 8 बजे शुरू होने वाली थी, लेकिन कुछ समय लेते हुए यह सुबह 11.30 बजे शुरू हुई। इस मीटिंग का नेतृत्व भारत द्वारा हरिंदर सिंह ने किया है। हालांकि इस मीटिंग में अलग-अलग स्तर पर 3 बार चर्चा होने के बाद भी इसके कुछ ठोस परिणाम साबित नहीं हो पाए।

अब दोनों देशों की राजकीय चर्चा के बाद, एक उच्च स्तरीय सैन्य चर्चा हुई, जिस दौरान दोनों देशों ने एक दूसरे की संवेदनशीलता और चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, शांतिपूर्ण मार्ग से इस मतभेद को सुलझाने पर सहमति व्यक्त की है। इस विवाद को मिटाने की कोशिश जारी है, ऐसा दावा भारत द्वारा किया गया है, लेकिन किसी भी बड़े निष्कर्ष या गलत जानकारी को न फैलाने की चेतावनी भी दी गई है।

LAC : भारत-चीन क्या है

LAC का फुल फार्म है LINE OF ACTUAL CONTROL, जो भारत नियंत्रित क्षेत्र को चीनी नियंत्रित क्षेत्र से अलग करता है। भारत LAC को 3488 किमी का मानता है, जहाँ पर चीन इसे सिर्फ 2000 किमी का मानता है। इस सीमा के तीन मुख्य भाग है, पूर्व, मध्य और लदाख में पच्छिम क्षेत्र को फैलाता है।

1991 में चीन के प्रधानमंत्री ली पेंग भारत दौरे पर आए थे, तब LAC : भारत-चीन के विषय पर चर्चा की गई थी। भारत ने LAC : भारत-चीन को औपचारिक रूप से तब स्वीकार किया, जब 1993 ने नरसिंहा राव बीजिंग की यात्रा से वापस आए। इस यात्रा पर दोनों देशों ने LAC: भारत-चीन पर शांति बनाए रखने के लिए एक समझौता कर उसपर हस्ताक्षर किए।

LAC : भारत-चीन विवाद के मुख्य कारण

अरुणाचल प्रदेश के तवांग क्षेत्र पर चीन हमेशा से ही अपना हक जमाने की कोशिश करता आ रहा है।

चीन के पूर्व प्रधानमंत्री द्वारा, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जी को लिखे पत्रों को आधार बनाकर चीन विवाद खड़े करने की कोशिश करते आ रहा है।

1962 में हुए युद्ध के बाद चीन यही दावा करता रहा कि, 1959 में LAC, 20 किलोमीटर तक भारत की तरफ पीछे चला गया है।

भारत ने अक्साई चीन पर कभी भी अपना हक नहीं छोड़ा है और चीन अक्साई चीन को अपने कब्जे में करने की कोशिश लगातार करते ही जा रहा है।

LOC और LAC में फर्क क्या है।

सरल शब्दों में कहाँ जाए तो भारत और चीन के बीच प्रस्थापित सीमा रेखा को LAC कहाँ जाता है। वही पर भारत और पाकिस्तान के बीच प्रस्थापित सीमा रेखा को LOC कहाँ जाता है।

कश्मीर युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 1948 की संघर्ष विराम रेखा से LOC का जन्म हुआ है। 1972 में दोनों देशों में हुए शिमला समझौते के बाद इस सीमा को LOC का नाम दिया गया। भारत और पाकिस्तान, दोनों देशों की सेनाओं के DGMO द्वारा यह समझौता हस्ताक्षरित है और एक मानचित्र पर चित्रित किया गया है। साथ ही इस समझौते को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी मान्यता भी है।

अब LAC को देख जाए तो परिस्थिति LOC से एकदम विपरीत है। LAC केवल एक अवधारणा है। भारत और चीन के बीच में प्रस्थापित LAC दोनों भी देशों द्वारा सहमत नहीं है। न ही यह नक्शे पर चित्रित की गई है, न ही जमीन पर सीमांकित की गई है। LAC को लेकर भारत और चीन दोनों देश अलग-अलग दावे करते हुए नजर आते है। India v/s china

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